संस्थाएं जर्ज तो लोकतंत्र, आजादी ?

आजादी के अमृत महोत्सव का साल इस तरह नहीं शुरू होना चाहिए था। संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होना था और उसी दिन से अमृत महोत्सव के कार्यक्रम शुरू होने थे।

न्यायपालिका कब तक राह दिखाएगी?

न्यायपालिका का काम रास्ता दिखाने का है लेकिन तभी जब सरकारें रास्ता भटकती हैं। सवाल है कि सरकारें कितना रास्ता भटकेंगी और कितनी बार उनको रास्ते पर लाने का काम न्यायपालिका को करना होगा? और सोचें, कभी न्यायपालिका ने रास्ता दिखाना बंद कर दिया फिर क्या होगा? पिछले कई बरसों तक ऐसा होता रहा कि देश की न्यायपालिका सरकारी मार्ग को ही उचित मार्ग मानती रही थी। वह तो अच्छा है, जो अब न्यायपालिका ने सरकारी मार्ग को मुख्य और उचित मार्ग मानना बंद या कम कर दिया है। यह सुखद है कि देश की अदालतों ने सरकार के हर कदम का समर्थन करने की बजाय लोगों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सरकारों को निर्देश देना शुरू किया है। इससे केंद्र और राज्यों की सरकारों को सबक लेना चाहिए और अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। यह कितनी बुनियादी बात है कि कोरोना वायरस की महामारी के दौरान कांवड़ यात्रा नहीं होनी चाहिए लेकिन हैरानी की बात है कि उत्तर प्रदेश सरकार को इतनी सी बात समझ में नहीं आई। उसने कांवड़ यात्रा शुरू कराने का फैसला कर लिया। कुंभ मेले के आयोजन से मिले सबक की वजह से उत्तराखंड सरकार को सद्बुद्धि आ गई थी और उसने यात्रा रद्द कर… Continue reading न्यायपालिका कब तक राह दिखाएगी?

CORONA Arrangements : जिनके पास ऑक्सीजन उनको ही रेमडेसिविर ..इस व्यवस्था पर दिल्ली हाइकोर्ट की केंद्र पर टिप्पणी

देश के नागरिकों का हमेशा से ही न्यायपालिका पर विश्वास रहा है और हो भी क्यों ना..न्यायपालिका ने हमेशा से ही अपना काम बखूबी किया है। तो आज भी इस मुश्किल दौर में भारत की न्यायपालिका इस विश्वास की डोर को मजबूती दे रही है। न्यायपालिका में जहां नरमी दिखाते हुए सरकारों को समझाया है तो वहीं जरूरत पड़ने पर सख्ती दिखाने से भी परहेज नहीं किया। इसी का ताजा उदाहरण है कि दिल्ली हाइकोर्ट ।  दिल्ली हाइकोर्ट ने देश के मौजूदा हालात पर केंद्र सरकार द्वारा किये गए फैसलों पर तल्ख टिप्पणी की है। दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा है कि केंद्र चाहता है कि लोग मरते रहें क्योंकि Covid-19 के इलाज में रेमडेसिविर के इस्तेमाल को लेकर नए प्रोटोकॉल के मुताबिक केवल ऑक्सजीन पर आश्रित मरीजों को ही यह दवा दी जा सकती है। इसे भी पढ़ें UP News : योगी सरकार ने दिया निर्देश, अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई की कन्ट्रोल रूम से होगी निगरानी जिनके पास ऑक्सीजन नहीं उनके नसीब में रेमडेसिविर भी नहीं जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने केंद्र सरकार से कहा, ‘यह गलत है. ऐसा लगता है दिमाग का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं हुआ है। अब जिनके पास ऑक्सीजन की सुविधा नहीं है उन्हें रेमडेसिविर दवा नहीं मिलेगी।… Continue reading CORONA Arrangements : जिनके पास ऑक्सीजन उनको ही रेमडेसिविर ..इस व्यवस्था पर दिल्ली हाइकोर्ट की केंद्र पर टिप्पणी

राहुल को कमान संभालनी होगी!

अब राहुल गांधी के पास कोई विकल्प  नहीं है। उन्हे नेतृत्व संभालना होगा और दो टूक, लाउड मैसेज (कड़ा संदेश) देना होगा कि कोई नहीं बख्शा जाएगा! कानून कड़ाई से अपना काम करेगा। देश इस समय भारी अनिर्णय के दौर से गुजर रहा है। उसे नहीं मालूम किधर देखना है, किससे उम्मीद करना है। डरा हुआ समाज अपनी आवाज नहीं उठा सकता। उसे जो कहा जा रहा है कर रहा है। तुम्हारी किस्मत खराब है वह मान जाता है, 70 साल से कांग्रेस दोषी थी, सात साल से सिस्टम, वह मान जाता है। मौतें आक्सीजन की कमी से नहीं हो रहीं, मृत्यु को कौन रोक सकता है, वह मान जाता है। प्रचार तंत्र जो बता रहा है वह सब मान रहा है। उसकी बुद्धि, विवेक सब मीडिया ने हर ली है। मोदी, मोदी के नशे में उसे नहीं मालूम कि आगे कुआ है या खाई। उसके बच्चों का क्या होगा?  नौकरी का क्या होगा? तनखाएं और कितनी कम होंगी? नए कृषि कानूनों के बाद कल जब अनाज भी आक्सीजन की तरह मुनाफाखोरों के पास पहुंच जाएगा तो रोटी का क्या होगा? उसे कुछ नहीं मालूम! न वह मालूम करना चाहता है। उसे उम्मीद है कि हिन्दु, मुसलमान से सब समस्याओं… Continue reading राहुल को कमान संभालनी होगी!

न्यायपालिका क्यों है निशाने पर?

भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका के चार जजों की साझा प्रेस कांफ्रेंस के बाद न्यायपालिका पर संभवतः सबसे बड़ा हमला हुआ है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज के ऊपर आरोप लगाया है कि वे उनकी सरकार गिराने की साजिश में शामिल हैं।

पांच-छह लोगों की लॉबी न्यायपालिका के लिए खतरा

राज्यसभा सदस्य के तौर पर मनोनयन स्वीकार करने के बाद से आलोचनाओं का सामना कर रहे पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा है कि पांच-छह लोगों की एक लॉबी के शिकंजे की वजह से न्यायपालिका खतरे में है।

न्यायपालिका को कमजोर करने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण: गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केन्द्र सरकार पर न्यायपालिका को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस मुरलीधर का स्थानांतरण

लैंगिक समानता के लिए उपाय करना जरूरी : सीजेआई

भारत के मुख्य न्यायाधीश् (सीजेआई) शरद अरविंद बोबडे ने आज कहा कि न्यायपालिका संवैधानिक मूल्यों की संरक्षक है और कानून के शासन की प्रतिबद्धता के साथ जनवादी ताकतों की सेवा करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक ढांचे को किया मजबूत: कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश में न्यायपालिका की प्रगतिवादी सोच की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए आज कहा कि उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों ने देश के कानूनी और संवैधानिक ढांचे को मजबूती प्रदान की है।

संविधान के तीनों स्तंभों ने देश को रास्ता दिखाया : मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि तमाम चुनौतियों के बीच संविधान के तीनों स्तम्भों – न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका- ने संतुलन कायम रखते हुए देश को उचित रास्ता दिखाया है।

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