राजनीति में जाति ही अंतिम सत्य है

धर्म बदल लेने वालों ने भी कभी जाति नहीं बदली, जिस धर्म में गए वहां अपनी जाति लेते गए। सो, भारत में जाति परम सत्य है। और अगर राजनीति की बात हो तो वहां जाति के आगे कुछ नहीं है।

बेचारे बिहार के सीएम और नेता विपक्ष!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले। उनके साथ बिहार के नेताओं का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भी था।

पीएम-नीतीश की मुलाकात पर परदा क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पक्ष-विपक्ष के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मिला तो उस बारे में केंद्र सरकार की ओर से कोई ब्योरा क्यों नहीं जारी किया गया

नीतीश-तेजस्वी की केमिस्ट्री असली चीज है

बिहार में इसी बात की ज्यादा चर्चा है कि दोनों के बीच सद्भाव दिखा और मुख्यमंत्री ने तेजस्वी की तारीफ करते हुए कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल लेकर प्रधानमंत्री से मिलने का आइडिया उनका था।

अतीत गौरव में कैद

कोई राजनीति एक विकासक्रम के साथ आगे बढ़ती है। अगर नेतृत्व इसे समझते हुए अपने एजेंडे को विकसित नहीं करता, तो वो सियासत गतिरुद्ध हो जाती है।

ओबीसी वोट की चिंता में प्रादेशिक नेता

भाजपा ने प्रादेशिक पार्टियों के ओबीसी वोट बैंक में जबरदस्त सेंध लगाई है। नरेंद्र मोदी की कमान में भाजपा की पहली जीत यानी 2014 में ऐसा नहीं हुआ था।

भाजपा क्यों नहीं कराएगी जातियों की गिनती!

इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी बहुत जोर-शोर से ओबीसी राजनीति कर रही है और उसको इसका फायदा भी मिल रहा है। लेकिन पार्टी जाति आधारित जनगणना नहीं कराएगी।

जाति जनगणना, मोदी से मिले बिहार के नेता

बिहार के 10 नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की।

जाति जनगणना के लिए मोदी से मिलेंगे बिहार के नेता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मिलने का समय दे दिया।

राज्य क्यों नहीं कराते जातियों की गिनती?

केंद्र सरकार जातियों की गिनती कराने को राजी नहीं है। सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है। कोरोना वायरस की महामारी की वजह से जनगणना अभी तक शुरू नहीं हुई है।

एनपीआर के बगैर जातिगत जनगणना नहीं संभव: नायडू

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने आज सदन में कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के बगैर जातिगत जनगणना संभव नहीं है।

लालू ने जातिगत जनगणना की मांग उठाई

पटना। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने एकबार फिर जातीय जनगणना कराए जाने की मांग उठाई है। राजद नेता लालू प्रसाद ने कहा कि जातिगत जनगणना में आखिर क्या दिक्कत है। उन्होंने शनिवार को ट्वीट किया कथित एनपीआर, एनआरसी और 2021 की भारतीय जनगणना पर लाखों करोड़ खर्च होंगे। सुना है एनपीआर में अनेकों अलग-अलग कॉलम जोड़ रहे हैं, लेकिन इसमें जातिगत जनगणना का एक कॉलम और जोड़ने में क्या दिक्कत है? क्या 5000 से अधिक जातियों वाले 60 प्रतिशत अनगिनत पिछड़े-अतिपिछड़े हिंदू नहीं है, जो आप उनकी गणना नहीं चाहते? गौरतलब है कि इन दिनों नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर देशभर में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसे भी पढ़ें : नजरबंदी शिविरों को लेकर झूठ बोलते हैं मोदी : राहुल देश के कई जगहों पर इसके खिलाफ हिंसा की खबर आई है। कई राज्यों में एहतियातन इंटरनेट बंद किया गया तो वहीं देश के अन्य हिस्सों में इसको लेकर कदम उठाए गए हैं। विपक्ष दलों की तरफ से लगातार इसके खिलाफ आंदोलन किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लालू चारा घोटाला… Continue reading लालू ने जातिगत जनगणना की मांग उठाई

और लोड करें